Wheat Varieties: 2025 में गेहूं की टॉप 3 नई वैरायटी, जो दिलाएंगी रिकॉर्ड पैदावार और शानदार मुनाफा

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Wheat Varieties: 2025 में गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए यह खुशखबरी है। भारतीय गेहूं अनुसंधान संस्थान और करनाल यूनिवर्सिटी द्वारा जारी की गई तीन नई गेहूं की वैरायटी HD 3385, DBW 327 (करण शिवानी) और Pusa Ojaswi (HI 1650) इस साल सबसे ज्यादा लोकप्रिय हो रही हैं।

इस लेख में हम जानेंगे कि इन किस्मों की पैदावार कितनी है, कौन से क्षेत्र में उपयुक्त हैं, बुवाई का सही समय क्या है, सिंचाई और खाद प्रबंधन कैसे करें, ताकि किसान भाई अधिकतम उत्पादन प्राप्त कर सकें।

Wheat Varieties: गेहूं की टॉप 3 नई वैरायटी

HD 3385 गेहूं की वैरायटी

HD 3385 गेहूं की वैरायटी को 2023 में भारतीय गेहूं अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIWBR) ने जारी किया था। यह वैरायटी उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों जैसे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, यूपी और मध्य प्रदेश के लिए आदर्श मानी जाती है।

यह वैरायटी सिंचित और समय पर बुवाई के लिए सबसे उत्तम है। इसकी हाइट लगभग 98 सेंटीमीटर होती है जिससे गिरने की समस्या नहीं होती। HD 3385 में पीले और भूरे रतुआ रोग के प्रति अच्छी प्रतिरोधक क्षमता है। इसकी बालियां लंबी और चमकदार दाने वाली होती हैं, जो रोटी के लिए भी बेहतरीन मानी जाती हैं।

अगर बुवाई 25 अक्टूबर से 20 नवंबर के बीच की जाए और खाद प्रबंधन सही हो, तो किसान प्रति एकड़ 28 से 33 क्विंटल तक की पैदावार निकाल सकते हैं। यह वैरायटी HD 2967 और HD 3086 जैसी लोकप्रिय किस्मों से 10-15% अधिक उत्पादन देने में सक्षम है।

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DBW 327 (करण शिवानी)

DBW 327, जिसे किसान करण शिवानी वैरायटी के नाम से जानते हैं, 2021 में करनाल यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई थी। यह वैरायटी 155 दिनों में तैयार होती है और हीट वेव (गर्म हवाओं) को झेलने में सक्षम है। यानी कि जब अन्य वैरायटियों का दाना पिचक जाता है या क्वालिटी खराब होती है, तब भी DBW 327 शानदार पैदावार देती है।

इसकी हाइट 95 से 98 सेंटीमीटर तक रहती है और गिरने की संभावना बहुत कम होती है। अगर किसान अंगेती या समय पर बुवाई (25 अक्टूबर से 15 नवंबर) करें, तो यह किस्म 30 से 34 क्विंटल प्रति एकड़ तक की पैदावार दे सकती है। हालांकि, इसमें 6 से 7 सिंचाई की आवश्यकता होती है, इसलिए यह वैरायटी उन्हीं किसानों के लिए बेहतर है जिनके पास पर्याप्त सिंचाई साधन उपलब्ध हों।

Pusa Ojaswi (HI 1650)

Pusa Ojaswi, जिसे HI 1650 नाम से भी जाना जाता है, 2022 में भारतीय गेहूं अनुसंधान संस्थान द्वारा जारी की गई थी। यह वैरायटी मध्यम अवधि (115 से 120 दिन) में तैयार होती है और कम पानी वाले किसानों के लिए भी उपयुक्त है।

इसके दाने चमकीले, वजनदार और ठोस होते हैं, जिससे यह रोटी, ब्रेड और बिस्किट उद्योग के लिए बेस्ट वैरायटी मानी जा रही है। अगर किसान 10 नवंबर से 25 नवंबर के बीच बुवाई करें, तो यह किस्म मध्यम पछेती बुवाई के लिए भी उपयुक्त साबित होती है।

यह वैरायटी मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और कोटा क्षेत्र में सफलतापूर्वक लगाई जा सकती है। एक एकड़ में किसान 28 से 30 क्विंटल तक की उपज प्राप्त कर सकते हैं और इसकी गुणवत्ता के कारण मंडी में अच्छा दाम मिलता है।

सिंचाई और खाद प्रबंधन से बढ़ाएं उपज

इन तीनों वैरायटियों की अधिकतम पैदावार पाने के लिए किसान भाइयों को बुवाई के समय सही खाद मिश्रण डालना चाहिए। डीएपी 50 किलो, एमओपी 30 किलो, यूरिया 20 किलो और एसएसपी 50 किलो प्रति एकड़ डालने से फसल को शुरुआती विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं। अच्छे फुटाव के लिए बीज दर 40-50 किलो प्रति एकड़ पर्याप्त है और लाइन की दूरी 18 सेंटीमीटर रखनी चाहिए।

निष्कर्ष

2025 में गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए HD 3385, DBW 327 और Pusa Ojaswi तीनों वैरायटी नई उम्मीद लेकर आई हैं। इनमें से कोई भी वैरायटी यदि सही समय और प्रबंधन के साथ बोई जाए तो किसान भाई प्रति एकड़ 30 क्विंटल तक उपज प्राप्त कर सकते हैं। यह न केवल पैदावार बढ़ाने वाली किस्में हैं बल्कि रोगों के प्रति रेजिस्टेंस और मौसम की मार झेलने में भी सक्षम हैं।

FAQs

Q1. HD 3385 गेहूं की वैरायटी कब बोनी चाहिए?
25 अक्टूबर से 20 नवंबर के बीच बुवाई का समय सबसे उपयुक्त है।

Q2. DBW 327 करण शिवानी वैरायटी की पैदावार कितनी है?
यह वैरायटी प्रति एकड़ 30 से 34 क्विंटल तक पैदावार दे सकती है।

Q3. Pusa Ojaswi वैरायटी किन किसानों के लिए उपयुक्त है?
यह मध्यम अवधि की वैरायटी है, जो कम सिंचाई वाले किसानों के लिए भी उपयुक्त है।

Q4. इन वैरायटियों में कौन-कौन सी खाद डालनी चाहिए?
डीएपी, एमओपी, यूरिया और एसएसपी की उचित मात्रा डालने से उपज में वृद्धि होती है।

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