हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में लॉन्च हुई नई गेहूं की किस्में, अब किसान 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज ले सकते हैं

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गेहूं की किस्में: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में आयोजित किसान मेले में इस बार किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ-साथ नई उन्नत गेहूं की किस्मों से भी रूबरू करवाया गया। विश्वविद्यालय के गेहूं वैज्ञानिक डॉ. ओमप्रकाश बिश्नोई और डॉ. पूजा गुप्ता ने बताया कि ये नई वैरायटीज़ खास तौर पर उन किसानों के लिए तैयार की गई हैं जिनके पास सिंचित भूमि, मजबूत मिट्टी और जैविक खाद के पर्याप्त साधन उपलब्ध हैं।

इन किस्मों से किसान 60 से 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज ले सकते हैं, जो पारंपरिक किस्मों की तुलना में काफी अधिक है।

नई गेहूं की किस्में

वैज्ञानिकों ने इस बार किसानों को BH-940, BSN-902, BSN-946 और BH-393 जैसी नई हाई-प्रोडक्टिव किस्मों से परिचित करवाया। इन किस्मों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये स्ट्राइप डिज़ीज और पत्तों के झुलसने जैसी बीमारियों के प्रति पूरी तरह रेजिस्टेंट हैं। इन फसलों की पत्तियां लंबे समय तक हरी रहती हैं, जिससे अनाज का भराव बेहतर होता है और दाने का वजन भी बढ़ता है।

डॉ. बिश्नोई ने बताया कि इन किस्मों में वैज्ञानिकों ने तीन स्तर पर अनुसंधान किया — पहला, जिन किसानों के पास कम पानी और सीमित संसाधन हैं; दूसरा, जिनके पास मध्यम स्तर के सिंचाई साधन हैं; और तीसरा, वे किसान जो पूरी सिंचाई और जैविक खाद का भरपूर उपयोग कर सकते हैं। इस वर्गीकरण से किसानों को उनके संसाधन के अनुसार सर्वश्रेष्ठ वैरायटी चुनने में मदद मिलेगी।

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हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में लॉन्च हुई नई गेहूं की किस्में, अब किसान 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज ले सकते हैं

गेहूं की किस्म BH-940

BH-940 वैरायटी उन किसानों के लिए विकसित की गई है जिनके पास मजबूत मिट्टी और पर्याप्त सिंचाई के साधन हैं। यदि इस किस्म को 15 नवंबर के आसपास बोया जाए, और प्रति एकड़ 35 किलो बीज के साथ डीएपी और 10 किलो जिंक सल्फेट का उपयोग किया जाए, तो इससे किसान 60 से 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं।

इस किस्म की विशेषता यह है कि यह गर्मी या बीमारी से झुलसती नहीं है, पत्तियां देर तक हरी रहती हैं, और बालियां भरपूर निकलती हैं। इससे उत्पादन में निरंतरता बनी रहती है।

BSN-902 और BSN-946

BSN-902 और BSN-946 किस्में खासतौर पर छः पंक्ति वाली (Six Row Variety) हैं। इन किस्मों के पौधे मजबूत तनों वाले होते हैं और बालियां भरपूर निकलती हैं। इनका उपयोग न केवल अनाज उत्पादन के लिए बल्कि पशु चारे (फॉडर) के लिए भी किया जा सकता है। इन किस्मों से किसानों को अनाज और चारा दोनों का लाभ एक साथ मिलता है।

इन किस्मों की एक और खूबी यह है कि इनकी उपज लगातार स्थिर रहती है। अन्य पारंपरिक किस्मों की तरह ये गिरती नहीं हैं, जिससे खेत में फसल सुरक्षित रहती है।

BH-825

BH-825 वैरायटी दो पंक्ति वाली गेहूं की किस्म है, जिसे विशेष रूप से माल्ट बार्ली उत्पादन के लिए विकसित किया गया है। यह किस्म ब्रुअरी इंडस्ट्री और पेय पदार्थ कंपनियों में इस्तेमाल के लिए उपयुक्त है। इस किस्म के दाने आकार में थोड़े बड़े होते हैं, जो माल्ट और बेवरेज इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुरूप हैं।

वैज्ञानिकों ने बताया कि पहले इस श्रेणी की किस्मों की पैदावार कम थी, लेकिन अब DW-137 और DW-182 जैसी नई किस्में भी विकसित की गई हैं, जो माल्ट क्वालिटी और उत्पादन दोनों में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।

उन्नत कृषि पद्धतियों से मिलेगा दोगुना मुनाफा

वैज्ञानिकों ने सलाह दी कि किसान गेहूं की बुवाई के समय डीएपी, यूरिया और जिंक सल्फेट का सही अनुपात रखें। बीज दर 35 किलो प्रति एकड़ रखें और जैविक खाद का उपयोग बढ़ाएं।
इन नई किस्मों के साथ यदि किसान समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण करें, तो फसल की गुणवत्ता और उपज दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

निष्कर्ष

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की ये नई गेहूं की किस्में किसानों के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आई हैं। इनसे न केवल रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी है बल्कि उपज भी 60 से 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है। मजबूत तने, चमकदार दाने और उच्च प्रोटीन गुणवत्ता के कारण ये किस्में भविष्य की खेती को नई दिशा देने वाली हैं।

किसान भाइयों के लिए यह सही समय है कि वे इन नई वैरायटीज़ को अपनाकर अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ाएं और आधुनिक कृषि की दिशा में कदम बढ़ाएं।

FAQs

प्रश्न 1. क्या ये नई गेहूं की किस्में सभी राज्यों में लगाई जा सकती हैं?
जी हां, ये किस्में उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों जैसे हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, और राजस्थान के लिए उपयुक्त हैं।

प्रश्न 2. गेहूं BH-940 की बुवाई का सही समय क्या है?
15 नवंबर के आसपास बुवाई करना सबसे उपयुक्त रहता है जिससे अधिकतम उपज मिलती है।

प्रश्न 3. क्या इन किस्मों को सूखे इलाकों में लगाया जा सकता है?
कुछ किस्में जैसे BSN-902 और BH-393 सीमित सिंचाई वाले इलाकों के लिए भी अनुकूल हैं।

प्रश्न 4. माल्ट बार्ली किस्मों का क्या उपयोग है?
BH-825 जैसी दो पंक्ति वाली किस्में पेय पदार्थ और माल्ट उद्योग के लिए इस्तेमाल होती हैं।

प्रश्न 5. क्या इन किस्मों का बीज किसानों को विश्वविद्यालय से मिल सकता है?
जी हां, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार से किसान प्रमाणित बीज प्राप्त कर सकते हैं।

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