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Chickpea High Yield Varieties in India: भारत में चना किसानों की सबसे महत्वपूर्ण फसल है, और हाल के वर्षों में वैज्ञानिकों ने ऐसी किस्में विकसित की हैं जो पहले से कहीं अधिक उपज दे रही हैं। इस लेख में हम चर्चा करेंगे भारत की टॉप 3 चने की किस्मों के बारे में जो इस समय सबसे अधिक उत्पादन दे रही हैं। साथ ही आप जानेंगे कि इन किस्मों का मूल बीज कहां से प्राप्त करें, किस इलाक़े के लिए ये सबसे उपयुक्त हैं, और क्यों ये किस्में किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रही हैं।
भारत की टॉप 3 चने की किस्में
महाराष्ट्र के महात्मा फूले कृषि विद्यापीठ, राहु द्वारा विकसित की गई ‘विक्रम’ किस्म को आज भारत की सबसे उपजाऊ चना किस्मों में गिना जाता है। इस किस्म की औसत उपज 42 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक दर्ज की गई है, जो अब तक किसी भी चने की किस्म में सबसे अधिक है।
इस किस्म की खासियत यह है कि यह अंत तक खड़ी रहती है, जिससे किसानों को फसल कटाई में कोई परेशानी नहीं होती। विक्रम किस्म में रोग लगने की संभावना भी बेहद कम होती है। यही कारण है कि यह किस्म महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान के अधिकांश क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

इसका ओरिजिनल बीज महात्मा फूले कृषि विद्यापीठ, राहु से सीधे प्राप्त किया जा सकता है। यह संस्थान किसानों को प्रमाणित और शुद्ध बीज उपलब्ध कराता है ताकि उन्हें अधिक उत्पादन मिल सके।
2. अग्नि किस्म – पुरानी होते हुए भी आज भी सबसे भरोसेमंद
अग्नि किस्म, जिसे वर्ष 1958 में विकसित किया गया था, आज भी कई राज्यों में किसानों की पहली पसंद बनी हुई है। इसकी औसत उपज 26 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मानी जाती है। अगर किसान इसे वैज्ञानिक पद्धति से बोएं तो यह किस्म 30 क्विंटल तक उत्पादन दे सकती है।
इस किस्म का बीज नेशनल सीड्स कॉरपोरेशन, एग्रीकल्चर रिसर्च स्टेशन गंगानगर (सूरतगढ़) और जिले के सहकारी समितियों से प्राप्त किया जा सकता है। यह किस्म अधिक और कम पानी वाले दोनों इलाकों के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
अग्नि किस्म का पौधा मजबूत होता है, जो तेज हवा या हल्की बारिश में भी नहीं गिरता। यही वजह है कि यह किस्म वर्षों से किसानों का भरोसा बनी हुई है।
3. आरवीजी 204
तीसरी सबसे बेहतरीन किस्म है आरवीजी 204, जिसे एग्रीकल्चर रिसर्च स्टेशन, सीहोर (मध्य प्रदेश) द्वारा विकसित किया गया है। यह किस्म न सिर्फ उपज में शानदार है, बल्कि इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अधिक है।
आरवीजी 204 किस्म ने पारंपरिक किस्मों की तुलना में 32% तक अधिक उत्पादन दिया है। यह किस्म मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और उत्तर भारत के इलाकों के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। इसका पौधा 18 इंच तक लंबा होता है और इसमें दाने भरे हुए, चमकीले और एकसमान आकार के निकलते हैं।
इस किस्म का ओरिजिनल बीज सीहोर स्थित एग्रीकल्चर रिसर्च स्टेशन से प्राप्त किया जा सकता है। यह संस्थान किसानों को प्रमाणित बीज देकर उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद कर रहा है।
काबुली चने की बेहतरीन किस्म
काबुली चना के प्रेमियों के लिए सबसे शानदार किस्म है आईसीएआर (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद), नई दिल्ली द्वारा विकसित नई काबुली वैरायटी। यह किस्म खासतौर पर सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है।
इस किस्म में बड़े आकार के सफेद दाने निकलते हैं और बाजार में इनकी कीमत भी अधिक मिलती है। यदि किसान इसे समय पर बुवाई और सही सिंचाई के साथ उगाते हैं, तो यह फसल अन्य किस्मों से कहीं बेहतर उत्पादन देती है।
निष्कर्ष
भारत के किसानों के सामने अब चुनौती है कम लागत में अधिक उत्पादन लेने की। ऊपर बताई गई तीनों किस्में विक्रम, अग्नि और आरवीजी 204 — न केवल उच्च उत्पादन देती हैं बल्कि रोगों के प्रति भी काफी सहनशील हैं। इन किस्मों को अपनाकर किसान न केवल अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं बल्कि देश में दाल उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बड़ा कदम उठा सकते हैं।







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